फाइबर ऑप्टिक्स एक आधुनिक संचार तकनीक है जिसमें बहुत पतले काँच या प्लास्टिक के तार (fiber) के अंदर प्रकाश के रूप में डेटा भेजा जाता है। इसमें सिग्नल विद्युत धारा की जगह light pulses के रूप में ट्रांसमिट होते हैं, इसलिए डेटा बहुत तेज गति और कम हानि के साथ लंबी दूरी तक पहुँचता है।
आज इंटरनेट, टेलीफोन नेटवर्क, केबल-टीवी और हाई-स्पीड डेटा कम्युनिकेशन में फाइबर ऑप्टिक्स का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
फाइबर ऑप्टिक्स (Fiber Optics) क्या होता है?
तंतु प्रकाशिकी वह तकनीक होती है जिसकी सहायता से प्रकाश का ट्रांसमिशन पतली फाइबर्स (fibers) के माध्यम से होता है। ये तंतु पारदर्शी कांच या प्लास्टिक से बने होते है। यदि ये तंतु सीधे हो तो प्रकाश ऊर्जा बहुत ही कम नष्ट होती है लेकिन इनमे थोड़ा सा भी मोड़ आ जाता है तो प्रकाश ऊर्जा का क्षय होने लगता है क्योंकि ऐसी स्थित में प्रकाश का बिखराव हो जाता है। तंतु प्रकाशिकी में सामान्यतः शीशे के तंतुओं का ही उपयोग किया जाता है जिनका व्यास लगभग 120 माइक्रोमीटर होता है। प्रत्येक तंतु शीशे का बना एक कोर होता है जिसका व्यास 50 माइक्रोमीटर तथा उसके चारो ओर शीशे के क्लैड का निर्माण किया जाता है इसकी मदद से पूर्ण आंतरिक परावर्तन के उपरान्त तंतु के कोरे में से प्रकाश का उपयोग किया जाता है कोर का अपवर्तनांक क्लेड की तुलना में अधिक होता है, हालाकि क्लैडिंग में प्रकाश नही होता है फिर भी यह तंतु का एक अनिवार्य भाग होता है। इसकी मदद से तंतु का संपूर्ण लम्बाई तक क्रांतिक कोण (critical angle/क्रिटिकल एंगल) का मान सामान्य बना रहता है।
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Fiber Optics के Advantage
ऑप्टिकल फाइबर एक आधुनिक संचार माध्यम है जिसमें काँच या प्लास्टिक के बहुत पतले तार के अंदर प्रकाश (light signals) के रूप में डेटा भेजा जाता है। पारंपरिक तांबे की केबल की तुलना में इसमें सिग्नल की गति बहुत अधिक, हानि (loss) बहुत कम और दूरी अधिक होती है। यही कारण है कि आज इंटरनेट, टेलीफोन, केबल-टीवी और हाई-स्पीड नेटवर्किंग में ऑप्टिकल फाइबर का व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
फाइबर ऑप्टिक्स के मुख्य लाभ के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है:
1. तंतु प्रकाशिकी से विस्फोट और जलने का खतरा नहीं होता है।
2. तंतु प्रकाशिकी में विद्युत प्रवाह न होने के कारण अनचाही सूचनाओं का संचरण नही होता है अर्थात तंतु प्रकाशिकी शोर (noise) से स्वतन्त्र होता है।
3. तंतु प्रकाशिकी विद्युत चुम्बकीय प्रेरण, रेडियो संकेतो, तड़ित व अन्य सामान्य संकेतो के प्रतिरोधक की क्षमता रखता है।
4. पारंपरिक तंतुओं की अपेक्षा प्रकाश तंतुओं का भार कम होता है अर्थात ये हल्के होते है।
5. तंतु प्रकाशिकी में वीडियो के साथ–साथ सभी प्रकार के आंकड़ों को भेजा जा सकता है।
6. तंतु प्रकाशिकी में मूल कच्ची सामग्री में सिलिका SiO2 का प्रयोग किया जाता है जोकि बहुत ही आसानी से मिल जाता है।
7. तंतु प्रकाशिकी में बिना किसी विशेष ऊर्जा क्षय के सूचनाओं का संप्रेषण किया जाता है।
8. तंतु प्रकाशिकी में स्पार्किंग की समस्या नहीं होती है।
9. तंतु प्रकाशिकी वार्तालाप और शोर से मुक्त होता है।
10. तंतु प्रकाशिकी में 50 गीगा बिट्स प्रति क्षमता वाले 40 हजार टेलीफोनी को साथ ढोने की क्षमता होती है।
11. तंतु प्रकाशिकी में बिना किसी रिपीटर की मदद से 70 किलोमीटर तक की दूरी तक सूचनाओं को भेजा जा सकता है।
12. तंतु प्रकाशिकी का उपयोग शरीर के आंतरिक अंगों के परीक्षण के लिए किया जाता है। जैसे– एंडोस्कोपी में।
Fiber Optics की Limitations
हालाँकि फाइबर ऑप्टिक्स संचार का बहुत तेज और आधुनिक माध्यम है, लेकिन इसके उपयोग में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयाँ भी होती हैं। इसकी स्थापना, रख-रखाव और हैंडलिंग तांबे की केबल की तुलना में अधिक सावधानी और विशेष उपकरणों की मांग करती है। इसलिए हर परिस्थिति में इसका उपयोग आसान या किफायती नहीं होता।
अब इसकी मुख्य Limitations नीचे समझते हैं —
- तंतु प्रकाशिकी में प्रकाश स्रोत का मॉड्यूलेशन एक निश्चित सीमा तक ही सम्भव होता है।
- न्यून शक्ति स्रोतो के कारण दो प्रवर्धको के बीच न्यून दूरी की आवश्यकता होती है।
- तंतु प्रकाशिकी में मूल सामग्री के रूप में सिलिका का उपयोग होने के बावजूद इन पर ताबे के तार की अपेक्षा अधिक व्यय होता है।
- तांबे के तार की अपेक्षा तंतुओं को जोड़ना आसान नहीं होता है। अर्थात तंतु प्रकाशिकी में जोड़ लगाना कठिन होता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
फाइबर ऑप्टिक्स आधुनिक संचार प्रणाली की रीढ़ बन चुका है क्योंकि यह बहुत तेज गति, कम सिग्नल लॉस और उच्च बैंडविड्थ प्रदान करता है। हालांकि इसकी लागत, इंस्टॉलेशन की जटिलता और विशेष मेंटेनेंस जैसी कुछ सीमाएँ भी हैं, फिर भी लंबी दूरी और हाई-स्पीड डेटा ट्रांसमिशन के लिए यह सबसे विश्वसनीय तकनीक साबित होती है।
इसलिए सही आवश्यकता और बजट के अनुसार फाइबर ऑप्टिक्स का उपयोग करने पर संचार प्रणाली अधिक प्रभावी, सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख बन सकती है।।
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